uttarakhand bear attack: उत्तराखंड में वन्य जीव और मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों में डर का माहौल है। स्थिति गंभीर है। वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभाग ने स्थिति को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दी है।
वन विभाग के खिलाफ़ लोगों का गुस्सा
जंगली जानवरों के हमले के चलते उत्तराखंड वन विभाग सवालों के घेरे में आ गया हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने विभाग के खिलाफ़ भारी गुस्सा है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा है।
एहतियात बरतने की सलाह

पहाड़ी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय यह है कि जिन क्षेत्रों में पहले भालू नहीं दिखाई देते थे, उन क्षेत्रों से भी भालू के आतंक की खबरें सामने आ रही है।भालू के बढ़ते हुए हमले को देखते हुए वन विभाग उत्तराखंड ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।साथी जागरूक रहने के लिए भी कहा है।
बढ़ते हमले का कारण
वन विभाग के अनुसार भालू के बढ़ते हमले(uttarakhand bear attack) का कारण भोजन की कमी है। कुछ विशेष फसल की कमी के कारण भालू को भोजन नहीं मिल पा रहा। वह भोजन की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों में जा रहा है। जिससे मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं देखी जा रही है।
अगर आंकड़ों की बात करें तो पिछले 5 सालों में भालुओं के हमले में उत्तराखंड में 14 लोगों ने अपनी जान गवाई है। जबकि 438 लोगों को घायल किया है। वहीं 450 से ज्यादा हमले रिकॉर्ड किए गए है।
यह भी पढ़ें। ESMA Act Uttarakhand: उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के हड़ताल पर रोक







